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Talk to me
Sunday, November 15, 2009 at 10:02 AM Posted by Abhishek Kumar Verma
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मुझे तो अपनों ने लुटा,
Tuesday, October 20, 2009 at 9:28 PM Posted by Abhishek Kumar Verma
मुझे तो अपनों ने लुटा,गैरों में कहा दम था.
मेरी हड्डी वह टूटी,
जहाँ हॉस्पिटल बंद था.
मुझे जिस एम्बुलेंस में डाला,
उसका पेट्रोल कम था.
मुझे रिक्शे में इसलिए बैठाया,
क्योंकि उसका किराया कम था.
मुझे डाक्टारो ने उठाया,
नर्सो में कहाँ दम था.
मुझे जिस बेड पर लिटाया,
उसके नीचे बम था.
मुझे तो बम से उड़ाया,
गोली में कहाँ दम था.
और मुझे सड़क में दफनाया,
क्योंकि कब्रिस्तान में फंक्शन था.
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हमको अमेरीका में नौकरी मिल गयी है.
at 9:23 PM Posted by Abhishek Kumar Verma
प्रसाद ने अपना बायो-डाटा माइक्रोसॉफ्ट कारपोरेशन, यु एस ए. में नौकरी के पाने के लिए अप्लाई किया.
कुछ दिनों बाद वहां से रिप्लाई आया :
Dear Mr. Laloo Prasad,
You do not meet our requirements.
Please do not send any further correspondence.
No phone call shall be entertained.
Thanks Bill Gates.
लालू प्रसाद खुशी के मारे उछलने लगे इस रिप्लाई को पड़ने के बाद.
और उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेंस की व्यवस्था की :
"भाइयों और बहनों,आप को जान कर ख़ुशी होगी की हमको अमेरीका में नौकरी मिल गयी है.
" हर कोई आश्चर्य चकित था .
लालू जी बोलते रहे ... ..
"अब हम आप सब को अपना अपोईंमेंट लैटर पढ़कर सुनाऊंगा,
पर लैटर अंग्रेजी में है - इसलिए साथ साथ हिंदी में ट्रांसलेट भी करूंगा.
Dear Mr.Laloo Prasad--प्यारे लालू प्रसाद भैय्या 
You do not meet----आप तो मिलते ही नहीं हो
our requirement --हमको तो ज़रुरत है
Please do not send any further correspondence --अब लैटर वैटर भेजने का कौना ज़रुरत नाही
No phone call----फोनवा का भी ज़रुरत नाही है
shall be entertained ---बहुत खातिर की जायेगी.
Thanks----आपका बहुत बहुत धन्यवाद.
Bill Gates----तोहार बिलवा.
और फिर सोचा की घर पे जो बच्चे है वो किसके है?
at 9:17 PM Posted by Abhishek Kumar Verma
और फिर सोचा की घर पे जो बच्चे है वो किसके है?

रस्ते में उसकी तबीअत ख़राब हो गई.
आपको टेंशन!!
आप हॉस्पिटल ले गए,
डॉक्टर बोला – आप बाप बनने वाले हो
आपको टेंशन !!
आप बोले – मै इसका बाप नहीं !
फिर लड़की से पूछा
लड़की बोली – येही बाप है.
आपको और टेंशन.
फिर पुलिस आई
आपका मेडिकल चेकप हुआ.
रिपोर्ट आई.
आप तो कभी बाप ही नहीं बन सकते.
आपको और टेंशन !
आप ने खुदा का शुकर अदा किया और आप ख़ुशी ख़ुशी घर गए !
और फिर सोचा की घर पे जो बच्चे है
वो किसके है…????????
आपको फिर से टेंशन ............
::::एक दुखी बेसहारा आशिक:::::---
Tuesday, January 13, 2009 at 11:11 PM Posted by Abhishek Kumar Verma

----::::एक दुखी बेसहारा आशिक:::::---
दो पल की भी खुशी न मिली तो क्या हुआ
उमर भर गम के सहारे जी लेंगे..
क्या हुआ जो हमारी girlfriend नही,
हम आपकी girlfriend के सहारे जीलेंगे.
--::अर्ज़ क्या है:::--
बहार आने से पहले फिजा आ गई,
की बहार आने से पहले फिजा आ गई,
और फूल खिलने से पहले...
उन्हें बकरी खा गई..!
---:::अर्ज़ किया हैं:::---
हम भी आपके लिए ताजमहल बनायेंगे..
गौर कीजिये,
हम भी आपके लिए ताजमहल बनायेंगे..
1 कप ख़ुद और 1 कप आपको पिलायेंगे!
वाह ताज!
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भिखारी : टमाटर ही दे दो..
at 11:11 PM Posted by Abhishek Kumar Verma

डॉक्टर फ़िल्म बनाते तो फ़िल्म का नाम क्या-क्या होता?
1.कभी खासी कभी दम.
2.कहो न बुखार हैं.
3.टी.बी. न.1.
4.कल मरीज़ हो न हो.
5.हम खून दे चुके सनम.
भिखारी : कुछ खाने को दो बाबा.
पंडित : टमाटर खा,
भिखारी : रोटी दो बाबा
पंडित : टमाटर खा,
भिखारी : टमाटर ही दे दो...
पंडित की बीवी : ये तोतले हैं, कह रहे है कमाकर खा.
बीवी : "मैं माईके जा रही हु , तुम्हे तलाक का नोटिस भेज दूंगी!"
पति : "जाजा , मीठी-मीठी बाते करके मुझे खुश करने की कोशिश मत कर.
बहुत देर बाद ट्रेन चली
मुस्लिम बोला "या अली"
हिंदू बोला "जय बजरंगबली"
1 आदमी बोला
क्या "अली" क्या "बलि"
ट्रेन तो बाजु वाली चली
वर्ल्ड बिना गर्ल्स के हो जाए तो क्या होगा?
गलिया सुनसान,
कॉलेज वीरान,
दुनिया परेशान,
तन्हा इन्सान,
न जानू,
न जान,
हर तरफ़ बस,
"जय हनुमान"
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बच्चा कैसे होता है।
at 11:01 PM Posted by Abhishek Kumar Verma
होश मे आने के बाद बोली, " बस जेल जाने की कसर ही बाकी रह गई थी .... नोट छाप कर वह भी पूरी करने का इरादा है जनाब का? "
मेरी हंसी रोके ना रुकी। बोला, " अरी भागवान , नोट छापने का असली मतलब सचमुच में नोट छापना नहीं है। "
" तो फिर ?"
" देखा नहीं, फिल्म में उस ज्योतिषी को ?.... कितनी सफाई से सलमान से पैसे ऐंठ लेता है और अनिल कपूर बेवकूफ बनाता है। "
" तो क्या हुआ ?"
" अपुन का भी बस यही आइडिया है। "
" तुम्हारे पूरे खानदान में भी कोई ज्योतिषी हुआ है जो तुम बनोगे ?"
" है तो नहीं लेकिन हमारी आनेवाली नस्ल ज़रूर राज ज्योतिषी कहलाएगी। "
" पर ये सब करोगे कैसे ?"
" अरे कुछ खास नहीं, बस थोड़ा-बहुत त्याग तो मुझे करना ही होगा। "
" वह भला कैसे ?"
अरे ये हीरो-कट बाल छोड़ सीधे-सीधे लम्बे बाल रखूंगा। "
" उसमें तो नाई का खर्चा भी बचेगा, " बीवी चहक उठी ।
" कर दी ना तुमने दो कौड़ी वाली बात .... अरे मैं लाखों में खेलने की सोच रहा हूं और तुम इन छोटी-छोटी बातों पर नज़र गड़ाए बैठी हो। "
" लेकिन आता-जाता तो कुछ है नहीं, खाली वेष बदलने से क्या होगा ?" बीवी फिर बोल पड़ी।
" अरे यार, पहले पूरी प्लानिंग तो सुन ले। "
" जी बताऒ, " बीवी आतुर नज़रों से मेरी तरफ ताकते हुए बोली।
" हां, तो मैं त्याग करने की बात कह रहा था। तो दूसरा त्याग यह करना पडेगा कि....ये गोविंदा-छाप कपड़े छोड़ धोती-कुरता पहनना पड़ेगा। "
" वह तो शादी का पड़ा-पड़ा अभी तक सड़ रहा है अलमारी में, " बीवी चहकते हुए फिर बोल पड़ी।
" चलो, यह काम तो आसान हुआ. अब कोने वाले कबाड़ी की दुकान से रद्दी छांटनी पड़ेगी। "
" आय-हाय। अब क्या रद्दी भी बेचोगे ?"
" जब पता नहीं होता , तो बीच में चोंच मत लड़ाया कर, " मैं आँखे तरेरता हुआ बोला, " बेवकूफ, पुराने अखबारों में जो भविष्यफल आता है, उसकी कतरनों को सम्भालकर रखूंगा, वक्त-बेवक्त काम आएंगी और अगर एस्ट्रॉलजी से रिलेटेड कोई किताब मिल गई तो... पौ-बारह समझो। "
" पौ-बारह मतलब ?"
" अरे बेवकूफ, पौ-बारह मतलब लॉटरी लग गई समझो। "
" लेकिन यह जन्तर-मन्तर कहां से सीखोगे भला ?"
" कोई खास मुश्किल नहीं है यह सब भी , बस...बल्ली सागू या फिर बाबा सहगल के किसी भी रैप सॉन्ग को कुछ इस अन्दाज़ से तेज़ी से होंठो ही होंठो मे बुदबुदाना होगा कि किसी के पल्ले कुछ ना पडे। बस हो गया.... ' जन्तर-मन्तर काली कलन्तर... "
" ऒह समझ गई.... समझ गई। "
बस फिर क्या था मोटी कमाई के चक्कर में बीवी के बटुए का मुंह खुल चुका था। ज़रूरी सामान इकट्ठा करने के बहाने पैसे ले मैं चल पड़ा बाज़ार। पहले ठेके से दारू की बोतल खरीदी और फिर जा पहुंचा बाज़ू वाले कबाड़ी की दुकान पर। एक-दो पेग मरवाए उसे और अपने मतलब की रद्दी छांट लाया।
अब दिन-रात एक करके हम मियां-बीवी उन कतरनो का एक-एक अक्षर चाट गए और इस नतीजे पर पहुंचे कि " पूरी दुनिया में इससे आसान काम तो कोई हो ही नहीं सकता। " अब आप पूछोगे कि , " वो भला कैसे ?"
तो ये मैं आपको क्यों बताऊं ? और अपने पैर पर ख़ुद ही कुलहाड़ी मार लूं ? कहीं मुझसे ही कॉम्पिटीशन करने का इरादा तो नहीं है आपका ?
क्या कहा ?.... चिंता ना करूँ ?
हर-एक को यही लगता है कि वह सही है और बाक़ी सब ग़लत, कोई उसे सही ढंग से समझ ही नहीं पाया आज तक, वह अपनी तरफ़ से कड़ी मेहनत करता है लेकिन उसका पूरा फल नहीं मिलता, सबके सब उसकी कामयाबी से जलते हैं, कोई उसका भला नहीं चाहता ... दोस्त-यार ... रिश्तेदार .. भाई-बहन ... पड़ोसी ... सब के सब मतलबी हैं ... कोई उसकी ख़ुशी से ख़ुश नहीं हैं...वह सब पर तरस ख़ाता है, लेकिन कोई उस पर नहीं खाता ... किसी ने उस पर कोई जादू-टोना किया हुआ है ... या फ़िर उसकी दुकान या मकान बांध दिया है...
फिकर नॉट... घुमा-फिरा कर 2-4 डायलॉग और मार दो बस... " कोई ना कोई तो अटकेगा ज़रूर। और हाँ... अगर ऊं चे लेवल का गेम खेलना है, तो दो-चार चेले-चपाटे भी साथ रख लो, एकाध चेली हो तो कहना ही क्या। अगर कोई ना मिले तो चौक से ही दिहाड़ी पर पकड़ लाओ।
" हे भागवान, पूरी रामायण खत्म होने को आई और यह पूछ रही है कि ... सीता , राम की कौन थी ?"
" अरी भागवान, अभी ऊपर सारे मंतर तो बताता आया हूँ...कोई ना कोई तो फ़िट बैठेगा ज़रूर।"
" हुं! " बीवी की समझ मैं बात आ चुकी थी।
सो एक दिन ऊपरवाले का नाम लिया और जा पहुंचा बीच बाज़ार और बरगद के पेड़ के नीचे डेरा जमाया। " कोई न कोई कोई असामी रोज़ टकराने लगी। किसी को कुछ , तो किसी को कुछ इलाज बताता उसकी हर तक़लीफ़ या बीमारी का। एक से तो मैने एक ही झटके में पूरे बारह हज़ार ठग डाले थे। बड़ी आई थी मज़े से कि " महाराज बच्चा नहीं होता है , कोई उपाय बताओ। "
मुंह उतर आया उस बेचारी का कि मैं अबला नारी... " कहाँ से लाऊंगी ये सब ?"
मैंने कहा, " आप चिंता ना करें। परसों मेरा शागिर्द नेपाल से आनेवाला है, उसको फ़ोन किए देता हूँ , वही सब इंतज़ाम कर देगा। " उसने हामी भर दी।
और चारा भी क्या था उसके पास ?
नकद गिन के पूरे बारह हज़ार धरवा लिए मैने। फिर जाने दिया उसे।
मोटी-कमाई हो चुकी थी, सो मैने अपना झुल्ली बिस्तरा संभाला और चल पड़ा घर की ओर।
रास्ते में विलायती की पेटी ले जाना नहीं भूला।
ख़ुश बहुत था मैं, बस पीता गया, पीता गया। कुछ होश नहीं कि कितनी पी और कितनी नहीं पी। होश आया तो बीवी ने बताया , " पूरे तीन दिन तक टुल्ली थे आप। ख़ूब उठाने की कोशिश की लेकिन कोई फ़ायदा नहीं। "
" तो क्या पूरे तीन दिन दुकान बन्द रही ?"
" और नहीं तो क्या ?"
मैं झट से खड़ा हुआ और भाग लिया सीधा दुकान की ओर। पूरे रास्ते यही सोचे जा रहा था कि तीन दिन में पता नहीं कितने का नुक़सान हो गया होगा ?
कई बार तो पता नहीं कैसे मेरा तुक्का सही लगने लगा था और किसी-किसी को थोड़ा-बहुत फ़ायदा भी होने लगा लेकिन 8-10 बार शिकायत भी आई कि " महाराज आपकी तरकीब तो काम न आई, कोई और जुगाड बताओ। " ऐसे बकरों का तो मुझे बेसब्री से इंतज़ार रहता था। एक ही पार्टी को 2-2 दफा शैंटी-फ्लैट करने का मज़ा ही कुछ और है। उसके द्वारा किए गये इलाज में कोई न कोई कमी ज़रूर निकलता और नये सिरे से बकरा हलाल होने को तैयार। पुरानी कहावत भी तो है कि " खरबूजा चाहे छुरी पर गिरे या फ़िर छुरी खरबूजे पर , कटना तो खरबूजे को ही पड़ता है।
अपुन का कॉन्फिडेंस ' टॉप-ओ-टॉप बढता ही जा रहा था कि एक दिन एक ' जाट-मोलढ ' टकरा गया ....
पूरी कहानी सुनने के बाद मैंने उससे , उसकी परेशानी का इलाज बताने के नाम पर 2 हज़ार माँग लिए। जाट सौदेबाज़ी पर उतर आया। आख़िर में सौदा 450 रुपये में पटा। उसने धोती ढीली करते हुए जो नोट निकाले, तो मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं। नज़र धोती में बंधी नोटों की गड्डी पर जा अटकी, लेकिन अब क्या फ़ायदा, जब चिड़िया चुग गयी खेत। मैं तो यही सोचे बैठा था कि बेचारा ग़रीब मानुस है, इसे तो कम से कम बख्श ही दूं। आख़िर ऊपर जाने के बाद वहां भी तो हिसाब देना पड़ेगा। लेकिन यह बांगड़ू तो मोटी आसामी निकला। यहीं तो मार खा गया इंडिया।
साढ़े चार सौ जेब के हवाले करते हुए मुंह से बस यही निकला, " ताऊ काम तो करवा रहे हो पूरे ढाई-हज़ार का और नोट दिखा रहे हो टट्टू ।"
" बेटा टट्टू तो तुमने अभी देखा ही कहाँ है ?"
" वो तो अब मैं तुम्हें दिखाऊंगा, " कहते हुए उसने किसी को इशारा किया और तुरंत ही मेरे चारों तरफ़ पुलिस ही पुलिस थी। " साले! पब्लिक का फुद्दू खींचता है। अब बताएंगे तुझे...चल थाने। बड़ी शिकायतें मिली हैं तेरे खिलाफ़। साले! वो S.H.O साहेब की मैडम थीं, जिससे तूने बारह हज़ार ठगे थे । चल अब हम तुझे बताते हैं कि बच्चा कैसे होता है।
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